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Rajsamand News :Rajsamand-R.K Hospitle-News

  • Writer: news rajsamand
    news rajsamand
  • Jul 27, 2020
  • 2 min read

निजी अस्पतालों में आधे से ज्यादा हो रहे सिजेरियन



निजी अस्पतालों में आधे से ज्यादा हो रहे सिजेरियन
निजी अस्पतालों में आधे से ज्यादा हो रहे सिजेरियन

तीन माह में छह प्रतिशत गिरी संस्थागत प्रसव दर

निजी अस्पतालों में आधे से ज्यादा हो रहे सिजेरियन प्रसव


राजसमंद. जिले में बढ़ते कोरोना का असर संस्थागत प्रसव में भी पड़ा है। ऐसे में प्रसूताओं ने अस्पताल जाने की बजाए घर में ही प्रसव को ज्यादा सुरक्षित समझा है। यही कारण है कि पिछले तीन महीने अप्रेल, मई और जून में गतवर्ष के इन्ही महीनों के मुकाबले करीब ६ फीसदी की गिरावट आई है। जबकि यह आकड़ा अधिकतर समय बढ़ते क्रम में रहते हैं।

दरअसल राजसमंद जिले के #भीलवाड़ा में मार्च माह में ही कोरोना संक्रमित मिलने शुरू हो गए थे, जिसके चलते जिला प्रशासन ने मार्च में ही जिला अस्पताल को #कोविड #अस्पताल में बदल दिया था, ऐसे में एक बड़ा डिलेवरी प्वाइंट कमजोर हो गया। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक #स्वास्थ्य केंद्रों पर भी खौफ के चलते कम प्रसूताएं पहुंच रही हैं। हालांकि अब जिला अस्पताल में प्रसव की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन फिर भी खौफ प्रसूताओं का रास्ता रोक रहा है।


निजी #अस्पतालों में आधे से ज्यादा हो रहे सिजेरियन

#राजसमंद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएसथिसिया तथा सर्जन चिकित्सकों का अभाव है। जिसके चलते पहले से ही जिला सिजेरियन प्रसव के मामले में पिछड़ा है। निजी चिकित्सालयों की तुलना में यहां के सरकारी अस्पतालों में महज 10 फीसदी ही सिजेरियन प्रसव होते हैं, इसमें भी अधिकतर ऑपरेशन राजकीय आरके जिला चिकित्सलय में ही होते हैं। वर्तमान समय में कोरोना को देखते हुए यहां सिजेरियन प्रसव कम हो रहे हैं। इधर #कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों में प्रसव ज्यादा हुए। ऐसे में निजी अस्पतालों ने 50 फीसदी से अधिक सिजेरियन प्रसव किए हैं।



#लॉकडाउन ने भी बिगाड़ी प्रसव की गणित

अप्रेल, मई और जून माह में कोरोना खौफ के साथ ही लॉकडाउन भी संस्थागत प्रसव में बाधक बना है। जानकार बताते हैं कि इस दौरान सारा स्वास्थ्य कर्मियों का ध्यान कोरोना में था, यहां तक की एम्बुलेंस भी कोरोना मरीजों और उनके सम्पर्क में आने वाले लोगों के लिए लगाई जा रही थीं, लॉकडाउन होने के कारण प्राइवेट वाहन समय पर उपलब्ध नहीं हो पाए। ऐसे में प्रसूताओं को अस्पताल जाने में समस्याएं हुई। संस्थागत प्रसव की दर गिरने में इसे भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।


घरों में प्रसव की संख्या बढ़ी

गतवर्ष के अप्रेल, मई और जून माह में 225 प्रसव घरों में हुए थे, जबकि इसबार इन तीन महीनों में 246 प्रसव घरों में हुए हैं, जो मुकाबले में करीब 21 अधिक हैं। ये आंकड़े भी सिर्फ वे हैं, जो चिकित्सा विभाग में दर्ज हुए हैं, जबकि वास्तव में यह संख्या बड़ी है।


आशाओं से सम्पर्क बढ़ाने को कहा...

हां तीन महीनों में संस्थागत प्रसव के कुछ आकड़े गिरे हैं। इसे लॉकडाउन और कोरोना का असर मान सकते हैं, बावजूद इसके हमने आशाओं को #गर्भवतियों से सम्पर्क में रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा संस्थागत प्रसव हो सकें।

-डा. सुरेश मीणा, आरसीएचओ, राजसमंद

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