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  • Writer: news rajsamand
    news rajsamand
  • Jun 29, 2020
  • 3 min read

जिले के 67 प्रतिशत लोग गरीब !

363002 राशनकार्ड में से 222861 राशन कार्ड खाद्य सुरक्षा में शामिल

व्यवसायी, व्यापारी, नेता उठा रहे खाद्य सुरक्षा योजना के गेहूं


-राजसमंद/आईड़ाणा. जिले के शहर, गांवों में बने बड़े-बड़े मकान, महंगी-महंगी गाडिय़ों में चलने वाले लोग भी गरीब है।news rajsamand
-राजसमंद/आईड़ाणा. जिले के शहर, गांवों में बने बड़े-बड़े मकान, महंगी-महंगी गाडिय़ों में चलने वाले लोग भी गरीब है।news rajsamand

राजसमंद/आईड़ाणा. जिले के शहर, गांवों में बने बड़े-बड़े मकान, महंगी-महंगी गाडिय़ों में चलने वाले लोग भी गरीब है।


ऐसा क्यों कह रहे हे पढ़ें पूरी खबर और जागरूक हो जाए


राजसमंद/आईड़ाणा. जिले के शहर, गांवों में बने बड़े-बड़े मकान, महंगी-महंगी गाडिय़ों में चलने वाले लोग भी गरीब है। ये हम नहीं कह रहे, ये खाद्य सुरक्षा में जुड़े लोगों के आकड़े बताते हैं। क्योंकि यहां बने 67 फीसदी राशन कार्ड खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़े हुए हैं। यानि 100 में से 67 लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। दरअसल सरकारी कर्मचारियों द्वारा खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ लेने के बाद मचे हो हल्ले के बाद पत्रिका के पास ऐसे लोगों की जानकारी भी पहुंची जो सभी तरह से सक्षम होने के बाद भी योजना का लाभ ले रहे है। इनमें व्यवसायी, व्यापारी, नेता एवं सक्षम परिवारों के नाम सम्मिलित है। पोर्टल पर इन लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र दर्शा रखा है। जिले में 67 प्रतिशत लोग खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र घोषित हैं। आकड़े चौकाने वाले हैं लेकिन यह हकीकत है। राजसमंद जिले में कुल 363002 राशन कार्ड हैं, जिसमें 1453285 यूनिट (राशनकार्ड सदस्य) है। आकड़ों के अनुसार अन्त्योदय एवं बीपीएल योजना में 20341 कार्ड एवं 84912 यूनिट इनकों एक रुपए किलो गेंहू दिया जाता है। खाद्य सुरक्षा योजना में चयनित एपीएल राशन कार्ड 202520 में 889211 यूनिट हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा योजना में चयनित लाभार्थियो में 22286 राशन कार्ड के 1974123 यूनिट है। जबकि खाद्य सुरक्षा में चयनित नहीं 140141 राशन कार्ड के 479162 है। ये आंकड़े 25 जून को विभाग की साइट पर उपलब्ध थे।


इमानदारी से हो, हर राशन कार्ड की जांच

सरकारी कर्मचारियों द्वारा राशन के गेहूं उठाने के बाद खुल रही परतों में राजनेता, उद्योगपति, व्यापारी एवं सक्षम परिवारों के नाम आने के बाद अब प्रत्येक राशन कार्ड की इमानदारी से जांच होने की जरूरत हैं। जिससे पात्र लोगों को योजना का लाभ मिल सके। सरकारी योजनाओं की बंदर बांट एवं लीपापोती के कारनामे तो खूब सुने लेकिन अब समय की मांग है कि गरीब के हक पर डाका डालने वाले सभी लोग बेनकाब हों। यदि रसद विभाग इसकी इमानदारी से जांच करे तो हजारों ऐसे लोगों के नाम उजागर होंगे जो सक्षम होने के बाद भी सरकारी योजनाओं के लाभार्थी बने हुए है। रसद विभाग को अपनी कार्यवाही सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रखनी चाहिए। वहीं जागरूक लोगों को आगे आ कर अपना नाम खाद्य सुरक्षा योजना से हटाने के लिए आवेदन करना चाहिए। जिससे बड़े स्तर पर होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लग सके।


सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा योजना का फायदा उठाने में प्रतिष्ठित लोग भी पीछे नहीं है। सरकारी कर्मचारियों पर खाद्य सुरक्षा योजना के गेहूं उठाने का मामला उजागर होने के बाद परत दर परत नई-नई चौंकाने वाली जानकारियां सुर्खियों में आ रही हैं। इसमें ऐसे ऐसे नाम समाने आ रहे जिनके बारे में एक बार तो विश्वास भी नहीं होता। लाखों की सम्पति एवं काम धंधे के बाद भी लोगों का नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ा होना विभाग की कार्यशैली पर सांवलिया निशान लगता रहा है। पत्रिका के पास ऐसे सैकड़ों लोगों की जानकारी पहुंची जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा के गेहूं उठा चुके है और उठा रहे हैं। ऐसे लोगो क्यां कार्यवाही होनी चाहिए आप कमेन्ट में जरुर बताए



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