top of page

Hindi News :India-Rajasthan-Rajsamand-Zoom-Marriage

  • Writer: news rajsamand
    news rajsamand
  • Jul 3, 2020
  • 2 min read

राजसमन्द:ऑनलाइन विवाह में 400 अतिथि साक्षी बने !

राजसमंद. इस कोरोना वायरस ने जितना आम लोगों को परेशान किया है उससे कहीं अधिक कई नया करने को भी प्रोत्साहित किया है। कुछ ऐसा ही नया पहली बार मंगलवार को मुंबई में हुआ जब राजसमंद जिले के दो परिवारों ने जूम एप्लीकेशन के जरिए अपने बच्चों के ऑनलाइन विवाह संस्कार पूरे किए। हुआ कुछ ऐसा कि निकट के रिश्तेदार शादी के ठीक एक दिन पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए। ऐसे में दोनों पक्षों के लोग चिंता में पड़ गए। इस पूरे घटनाक्रम में रास्ता दिखाने का काम किया पेशे चार्टर्ड अकाउंटेंट मूलत: आमेट के सलील लोढ़ा ने, जो लम्बे समय से मुंबई में कार्यरत हैं। दुल्हन का परिवार नेरूल (नवीं मुंबई) में और दुल्हे का परिवार चेंबूर (मुंबई) में रहता है। ये दोनों परिवार मूलत: केलवा/आमेट व पड़ासली में रहने वाले हैं।


ऑनलाइन हुई शादी

केलवा निवासी, मुंबई नेरुल प्रवासी श्रीमती सायरदेवी मदनलाल कोठारी की सुपौत्री एवं श्रीमती चंदा डॉ. विनोद कोठारी की पुत्री हर्षिता का विवाह सापोल निवासी हाल चेम्बूर प्रवासी सुशीलादेवी भंवरलाल सिंघवी के सुपौत्र एवं श्रीमती लाडी देवी गणपत सिंघवी के सुपुत्र मोहित सिंघवी के साथ मंगलवार रात 9.44 बजे सम्पन्न हुआ। वैसे विवाह वाशी के अबोट होटल में निर्धारित था, लेकिन परिवार के निकट के सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव आने से सारी तैयारियां धरी रह गई। दुल्हन के पिताजी व पेशे चिकित्सक ने काफी सूझबूझ का परिचय दिया और इस विवाह को ऑनलाइन करने का निर्णय किया। उन्होंने दूल्हे के पिता गणपत सिंघवी से बातचीत कर परेशानी की इस घड़ी को उत्सव में बदल दिया। दुल्हा व दुल्हन एमबीए हैं।


पुरानी परम्परा की याद दिलाई

दुल्हन के पिता पेशे से चिकित्सक हैं। उन्होंने इस बारे में अपने नजदीकी रिश्तेदार सुरेश रांका से बात की तो उन्होंने सरेरी/आसींद, भीलवाड़ा के पंडित दिनेश शास्त्री से इस विवाह बाबत चर्चा की। पंडित ने सुझाव दिया कि विधि विधान में स्वीकृत तरीके से इस विवाह को जहां दूल्हा और दुल्हन दूर रहते हुए सम्पन्न कर सकते हैं। प्राचीन काल में जब राजा, सिपाही, व्यापारी या कोई भी सामान्य जन अपरिहार्य कारणों से विवाह की निश्चित तिथि पर गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंच सकता था तो दूल्हे के प्रतीक के तौर पर खडग़, तलवार या छड़ी को भिजवाया जाता था, जिसके साथ दुल्हन सात फेरे लेती थी। सदियों पुरानी इस परम्परा को कोठारी परिवार व सिंघवी परिवार ने फिर से पुनर्जीवित करने का एक सफल प्रयास किया। बड़ी बात ये रही कि करीब 400 लोग इस ऐतिहासिक विवाह के ऑनलाइन साक्षी बने।


पंडित ने सरेरी/आसींद से पूरे कराए विधि विधान

सरेरी/आसींद से पंडित दिनेश शास्त्री ने विधि विधान द्वारा मंगल मंत्रोच्चार से विवाह सम्पन्न करवाया। वर मोहित चेम्बूर से व वधू हर्षिता ने नेरुल से अपने नए जीवन की शुरुआत ऑनलाइन अपने परिवार व मित्रों की ऑनलाइन उपस्थिति में सारे विधि विधान के साथ की। सीए सलिल लोढ़ा व श्रीमती यश विजय हिरन ने इस विवाह का सफल संचालन किया। मामा राजेन्द्र कुमठ पंडित के सहायक बने। जबकि दोनों पक्षों के अन्य परिजन ऑनलाइन साक्षी रहे और अपनी शुभकामनाएं व आशीर्वाद नव विवाहित दंपती को दिया। बड़ी बात ये भी रही कि सभी प्रशासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का भी पूरी तरह पालन किया। सलील लोढ़ा ने बताया कि खुद हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि विवाह का आयोजन इतना सफल रहेगा। अच्छा है दोनों परिवारों में जबर्दस्त खुशी है।


Comments


Post: Blog2_Post

Subscribe Form

Thanks for submitting!

  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn

©2020 by news rajsamand. Proudly created with Wix.com

bottom of page